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Showing posts from March, 2026

मलमास मे निषेध

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  श्रीराम । , मलमास (अधिक मास या पुरुषोत्तम मास) में भैरव, काली, दुर्गा आदि देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापना (प्राण-प्रतिष्ठा) नहीं हो सकती।   क्योंकि इसमें सूर्य संक्रांति नहीं होती। इसे शुभ कर्मों के लिए अशुभ माना गया है। इसमें निम्नलिखित कार्य स्पष्ट रूप से वर्जित हैं:विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, देव-प्रतिष्ठा / प्राण-प्रतिष्ठा (किसी भी देवता की मूर्ति स्थापना)। अधिकमास में देव प्रतिष्ठा, यज्ञ आदि निषिद्ध होने के) शास्त्रीय प्रमाण मुख्य रूप से धर्मसिंधु, स्मृति रत्नावली, पुराणों (विशेषकर पुरुषोत्तम मास माहात्म्य) और वैदिक/स्मृति ग्रंथों से मिलते हैं। प्रमुख श्लोक/वचन: गृह्यपरिशिष्ट (वैदिक साहित्य से) में अधिकमास (मलिम्लुच) के बारे में स्पष्ट निषेध: मलिम्लुचस्तु मासो वै मलिन: पापसम्भव: । गर्हित: पितृदेवेभ्य: सर्वकर्मसु तं त्यजेत् ॥ अर्थ: मलिम्लुच मास मलिन है और पाप से उत्पन्न हुआ है। यह पितरों और देवताओं से भी गर्हित (निंदित) है। इसलिए सभी कर्मों में इसे त्यागना चाहिए।यह श्लोक सीधे बताता है कि अधिकमास में देव-पितृ संबंधित सभी कर्म (प्रतिष्ठा सहित) वर्जित हैं। स्मृ...

चंडीपाठ में कवच अर्गला कीलक व सिद्ध कुञ्जिका से हवन निषेध

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  चंडीपाठ में कवच, अर्गला ,कीलक और कुंजिका स्तोत्र से हवन नहीं करना चाहिए। भैरवयामल तंत्र के भैरवभैरवी संवाद, चतुर्विंश प्रभाग होमप्रकरण में, भगवान शिव भैरव स्वरूप में स्थित होकर कहते हैं !  कवच , अर्गला , कीलक , तथा कुंजिका का होम स्वप्न में भी न करें  स्वप्न मात्र में भी होम करने से सर्वत्र नाश की संभावनाएँ प्रकट हो जाती है । कवचं, वार्गलाचैव, कीलकोकुंजिकास्तथा । स्वप्नेकुर्वन्नहोमं च, जुहुयात्सर्वत्रनष्ट्यते: ।। अर्गला के होमकर्म से सिद्धीयों का नाश हो जाता है । तथा होता की समस्त विद्याएँ विस्मृत हो जाती है , अर्गला अनर्गल सिद्ध हो जाती है । बुद्धिनाषोहुजेत् देवि,अर्गलाऽनर्गलोभवेत् । सिद्धीर्नाषगत: होता, विद्यां च विस्मृतोर्भभवेत् ।। कीलक के होमकर्म से होता के समस्त मन्त्र सदा सर्वदा के लिए कीलित हो जाते हैं । इसे मेरा उत्किलित कण्ठ ही जानें जो जो कीलक का कारक है । कीलितोजायतेमन्त्र: ,होमे वा कीलकस्तथा । ममकण्ठसमंयस्य: ,कीलकोत्कीलकं हि च ।। कवच के होम से धन,धान्य, पुत्र तथा प्राण का विनाश निश्चित है  एवं वह होता रोग तथा शोकों से घिर जाता है । धनधान्ययुतंभद्रे ,पुत...