ज्वालामुखी योग, मुहुर्त व ज्योतिष्य

श्रीराम!
भारतीय ज्योतिष्य मे अनेक शुभ अशुभ मुहुर्त है किन्तु इन सबमे सबसे भयानक योग है "ज्वालामुखी योग"। कहा जाता है कि-
*" जन्मे तो जीवे नही बसै तो ऊजड होय।"
कामनी पहने चूडियॉ, निश्चय विधवा होय।।""*
*"कुऐ नीर झॉके नही, खाट पडो न उठन्त।
ज्योतिषी जो जाने नही, ज्योतिष कहता ग्रंथ।।"*
 इसमे जन्म ले तो जीवे नही, घर मे बसे तो उजड जाय, सुहगिन चुडी पहने तो विधवा होय, कुऑ, बोरिंग आरंभ करे तो पानी न आये, बीमार पडे तो बीमारी ठीक न हो।
 
 यदि भूलवश भी इस योग में कोई कार्य आरंभ हो जाए तब वह सफल नहीं होता या बार-बार विघ्न-बाधाएँ व्यक्ति के समक्ष आती रहती हैं जिससे वह कार्य पूरी तरह से सिद्ध नहीं हो पाता. इसलिए इस योग में कोई भी शुभ कार्य आरंभ नहीं करना चाहिए ।

यह योग, तिथि और नक्षत्र के संयोग से बनता है, जैसे – प्रतिपदा तिथि के दिन मूल नक्षत्र हो, पंचमी तिथि को भरणी नक्षत्र हो, अष्टमी तिथि के दिन कृतिका नक्षत्र, नवमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र और दशमी तिथि को आश्लेषा नक्षत्र पड़ रहा हो तब ज्वालामुखी योग बनता है. 



पं. राजेश मिश्र "कण"
  भास्कर ज्योतिष्य व तंत्र मंत्र अनुसंधान केन्द्र, आजमगढ़।

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