शिवलिंग पर चढा़ प्रसाद खाना चाहिए य नही
श्रीराम । 30 जुलाई से श्रावण मास का आरम्भ हो रहा है। यह मास शिवपूजन के लिए बिशेष उपयोगी, व महत्त्वपूर्ण है। अतः जानने योग्य कुछ विशिष्ट बाते समय समय पर प्रेषित करने का प्रयास रहेगा। *शास्त्र के अनुसार शिवलिंग पर अर्पित प्रसाद खाना चाहिए या नहीं?* शिव पुराण और आगम शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर 2 तरह का प्रसाद होता है: . "निर्माल्य" - जो शिवलिंग को स्पर्श कर चुका है* *नियम: इसे नहीं खाते* कारण: शिवलिंग पर चढ़ा जल, बेलपत्र, फूल, दूध आदि "निर्माल्य" कहलाता है। ये भगवान का उच्छिष्ट है। शिव पुराण में कहा गया है कि शिवलिंग पर चढ़ा हुआ नैवेद्य केवल शिव और शिव के गण ही ग्रहण कर सकते हैं। *"शिवस्योच्छिष्टं नैवेद्यं भक्षयेत् न कदाचन"* मतलब: शिव को चढ़ाया हुआ उच्छिष्ट प्रसाद कभी नहीं खाना चाहिए। इसलिए मंदिर में पुजारी जी शिवलिंग पर चढ़ा दूध, जल नाली से बहा देते हैं। "नैवेद्य" - जो पास में थाली में रखकर भगवान को अर्पित किया है नियम: इसे खा सकते हैं जो फल, मिठाई, पेठा आदि शिवलिंग को स्पर्श नहीं कराते, सिर्फ सामने थाली में रखकर "भोग" लगाते हैं।...