ग्रहदोष व शांति के उपाय, सूर्य, चंद्र,मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र
आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक, व्यापारिक परेशानीयो का कारण ग्रहजनित पीडा होती है। इससे राहत के लिये विभिन्न ग्रहो की शांति के उपाय दिये जा रहे है।
सूर्य ग्रह की शांति के सरल उपाय
जिस व्यक्ति की कुण्डली मे सूर्य २,७,१०,१२ भाव मे हो विशेश कर उनके लिये
कई बार किसी समय-विशेष में कोई ग्रह अशुभ फल देता है, ऐसे में उसकी शांति आवश्यक होती है। गृह शांति के लिए कुछ शास्त्रीय उपाय प्रस्तुत हैं। इनमें से किसी एक को भी करने से अशुभ फलों में कमी आती है और शुभ फलों में वृद्धि होती है।
ग्रहों के मंत्र की जप संख्या, द्रव्य दान की सूची आदि सभी जानकारी एकसाथ दी जा रही है। मंत्र जप स्वयं करें या किसी कर्मनिष्ठ ब्राह्मण से कराएं। दान द्रव्य सूची में दिए पदार्थों को दान करने के अतिरिक्त उसमें लिखे रत्न-उपरत्न के अभाव में जड़ी को विधिवत् स्वयं धारण करें, शांति होगी।
सूर्य के लिए : समय सूर्योदय
भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें। आदित्य स्तोत्र या गायत्री मंत्र का प्रतिदिन पाठ करें। सूर्य के मूल मंत्र का जप करें।
मंत्र : 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रों सूर्याय नम:।'
40 दिन में 7,000 मंत्र का जप होना चाहिए। जप सूर्योदय काल में करें।
दान-द्रव्य : माणिक, सोना, तांबा, गेहूं, गुड़, घी, लाल कपड़ा, लाल फूल, केशर, मूंगा, लाल गाय, लाल चंदन।
दान का समय : सूर्योदय होना चाहिए। रविवार का व्रत करना चाहिए। रुद्राभिषेक करना चाहिए। एकमुखी या बारहमुखी रुद्राक्ष धारण करें।
चन्द्र ग्रह की शान्ति के उपाय-
~~~~~~~~~~~~~~
जिनकी कुण्डली मे चन्द्र कमजोर नीच पाप ग्रह से युत दुःस्थान य किसी प्रकार से अनिष्टकारी हो
चन्द्र के लिए : समय संध्याकाल
शिव एवं पार्वती माता की पूजा करें। अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें।
चंद्र के मूल मंत्र का11,000 जाप करें।
मंत्र : 'ॐ श्रां श्रीं श्रोक्तं चंद्रमसे नम:'।
दान द्रव्य : मोती, सोना, चांदी, चावल, मिश्री, दही, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, सफेद बैल, सफेद चंदन।
सोमवार का व्रत करें।सोमवार को देवी पूजन करें।
दोमुखी रुद्राक्ष धारण करें।
मंगल पीडा निवारण
~~~~~~~~~~
जिसकी कुण्डली मे मंगल अशुभ भाव (1,4,5,8,9,12 मे मंगल अमंगलकारी) हो, उसे मंगल की शान्ति हेतू निम्न उपाय करने चाहिये
दान - मूंगा.सोना, तॉबा,मसूर, गुड, घी, लालवस्त्र,केशर ,कस्तुरी,लाल चन्दन (दान अपनी सामर्थ्य के अनसार ही करना चाहिये)
अन्नत मूल(सारिवा) की जड शरीर पर धारण करने से मंगलजनित दोष की शान्ति होती है|
मंगल मंत्र का 10,000 जप किया जाय तो शान्ति होती है मंगल मंत्र-
एकाक्षरी बीजमंत्र- ऊँ अं अंगारकाय नमः|
तांत्रिक मंत्र- ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः |
मंगल जाप करनेवाले जातक को चाहिये की वह अपनी सामर्थ्य अनुसार 4 से8 रत्ती मूगा की अंगूठी प्राणप्रतिष्ठा पूर्वक बनवा अपनी अनामिका उगली मे धारण करे और सामर्थ्य अनुसार सोने य ताबे पर निर्मित भौम यंत्र एवंभौम मूर्ति की स्थापना कर उत्तराभिमुख सूर्योदय के 1 घंटे बाद तक जप करे | जप की समाप्ति पर खैर की लकडी से हवन करे|
मंगल का व्रत करे- मंगल को नमक न खाये।
बुध ग्रह कीशान्ति के लिये
~~~~~~~~~~~~~
जिन मनुष्यो के जन्मपत्रमे बुध लग्न से ६,८,१२ भाव मे से किसी मे हो नीच अस्त य नीचास्त होकर पीडित करता हो उन्हे निम्न उपाय करने से अवश्य ही लाभ होगा |
दान- पन्ना, सोना ,कांसा,घी,मूंग,हरावस्त्र, पंचरंग के फूल, हाथी दॉत, कपूर, शश्त्र और फल|
बुध देवता स्वर्णदान से शीघ्र प्रसन्न होते है , दान अपनी सामर्थ्य अनुसार ही करना चाहिये , कर्ज लेकर नही |
बुध की शान्ति हेतू विधारा वृक्ष की जड बुधवार के दिन जबशुभ नक्षत्र हो अपने घर लाकर विधिपूर्वक पूजन करके धारण करे तो निश्चय ही बुध जनित पीडा से राहत मिलेगी|
बुध मंत्र का जाप 9000 करना चाहिये
विनियोग- उदबुध्य ईति मन्त्रस्य परमेष्ठी ऋषिः बुधे देवता त्रिष्टुपछन्दःसौम्यमंत्रजपे विनियोगः
एकाक्षरी बीज मंत्र-ॐ बुं बुधाय नमः|
तांत्रिक बुध मंत्र- ॐ ब्रां ब्रीं, ब्रौं ,सः बुधाय नमः|
कॉसे के बर्तन मे देशी घी कपूर और शक्कर डालकर पानी मे बहा दे, बर्तन घर ले आये
कुमारी कन्याओ का पूजन करे
जन्मकुडंली मे स्थित गुरु भाव व दृष्टि के अनुसार शुभ व अशुभ फल का तीव्र कारक होता है शुभ भाव मे तो शुभ कारक है किन्तु अशुभ भाव मे होने पर शनि एवं मंगल से भी अधिक कष्टकर होता है, यह मेरा निजी अनुभव है|प्रायः गुरु लग्न व गोचर मे ३,६,८,१२ भावो मे अशुभ होता है|
जिनकी कुन्डली मे गुरु ३,८,९,१२ भाव मे बैठा हो उन्हे गुरु को प्रसन्न करने का उपाय करना चाहिये|
गुरु प्रतिदान-पुखराज, सोना,चने की दाल,घी, पीला वस्त्र, हल्दी,. गीता की पुस्तक,पीले फल|
धारण- पुखराज सोने मे य केले की जड, य सारंगी की जड पीले कपडा य धागा मे|
गुरु स्तुति-
देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते स्तः |
अनेक शिवयैः सम्पूर्णः पीडा दहतु मे गुरुः||
विनियोग
अस्य श्री वृहस्पतिमन्त्रस्यं गृत्समदऋषि ब्रह्मा देवता त्रिष्टुपछन्द बृहस्पति- मन्त्रजपे विनियोगः
सवीज वैदिक मन्त्र-ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः ॐ भूर्भुवः स्वः| ॐ बृहस्पतेअ्अतियर्ययो् अहदियुमद्विभाति वक्रतमज्जनेषु| यददीदयच्छवसअ्ॠतप्प्रजातु तदस्मासु द्रविणन्धेहि चित्रम् ॐ स्वः भूवः भूः ॐ सः ह्रौ, ह्री, ह्रां ॐ बृहस्पतये नमः|
एकाक्षरी बीज मन्त्र- ॐ बॄं बृहस्पतये नमः|
तान्त्रिक गुरु मन्त्र- ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः|
जपसंख्या- 19000
~~~~~~~~
जन्मकुडंली मे स्थित शुक्र भाव व दृष्टि के अनुसार शुभ व अशुभ दोनो फल का तीव्र कारक होता है शुभ भाव मे तो शुभ कारक है किन्तु अशुभ भाव मे धनहानि व कलहप्रदायक है प्रायः शुक्र लग्न व गोचर मे ३,६,७,८,१२ भावो मे अशुभ होता है|
जिनकी कुन्डली मे शुक्र ३,६,७,८,१२ भाव मे बैठा हो नीच अस्त य शत्रुक्षेत्री हो उन्हे शुक्र को प्रसन्न करने का उपाय करना चाहिये|
शुक्रप्रतिदान-हीरा, चॉदी,सोना, चावल,दूध सफेद वस्त्र, कपूर,कस्तुरी,सफेद चन्दन,सफेद मिठाई|
धारण- हीरा सोने य चादी मे सरपुंखा (झोंझरु) की जड सफेद कपडा य धागा मे|
शुक्र स्तुति-
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महाशुतिः |
प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीडां दहतु मे भृगुः||
विनियोग
अन्नात्परिस्रुत इति मन्त्रस्य प्रजापति ऋषिः अश्विसरस्वतीन्द्रा देवता जगतीछन्दः शुक्र मन्त्रजपे विनियोगः|
सवीज वैदिक मन्त्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः ॐ भूर्भुवः स्वः| ॐ अन्नात्परिस्रूतो रसम्ब्रह्मणा व्यपिवत्क्षत्रम्पयः सोमम्प्रजापतिः| ऋतेन सप्तमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धसअ्इन्द्रस्येन्द्रियमिदम्पयोमृतम्मधु ॐ स्वः भूवः भूः ॐ सः द्रौ, द्री, द्रां ॐ शुक्राय नमः|
एकाक्षरी बीज मन्त्र- ॐ शुं शुक्राय नमः|
तान्त्रिक शुक्र मंत्र- द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः|
जपसंख्या- 16000
सूर्य ग्रह की शांति के सरल उपाय
जिस व्यक्ति की कुण्डली मे सूर्य २,७,१०,१२ भाव मे हो विशेश कर उनके लिये
कई बार किसी समय-विशेष में कोई ग्रह अशुभ फल देता है, ऐसे में उसकी शांति आवश्यक होती है। गृह शांति के लिए कुछ शास्त्रीय उपाय प्रस्तुत हैं। इनमें से किसी एक को भी करने से अशुभ फलों में कमी आती है और शुभ फलों में वृद्धि होती है।
ग्रहों के मंत्र की जप संख्या, द्रव्य दान की सूची आदि सभी जानकारी एकसाथ दी जा रही है। मंत्र जप स्वयं करें या किसी कर्मनिष्ठ ब्राह्मण से कराएं। दान द्रव्य सूची में दिए पदार्थों को दान करने के अतिरिक्त उसमें लिखे रत्न-उपरत्न के अभाव में जड़ी को विधिवत् स्वयं धारण करें, शांति होगी।
सूर्य के लिए : समय सूर्योदय
भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें। आदित्य स्तोत्र या गायत्री मंत्र का प्रतिदिन पाठ करें। सूर्य के मूल मंत्र का जप करें।
मंत्र : 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रों सूर्याय नम:।'
40 दिन में 7,000 मंत्र का जप होना चाहिए। जप सूर्योदय काल में करें।
दान-द्रव्य : माणिक, सोना, तांबा, गेहूं, गुड़, घी, लाल कपड़ा, लाल फूल, केशर, मूंगा, लाल गाय, लाल चंदन।
दान का समय : सूर्योदय होना चाहिए। रविवार का व्रत करना चाहिए। रुद्राभिषेक करना चाहिए। एकमुखी या बारहमुखी रुद्राक्ष धारण करें।
चन्द्र ग्रह की शान्ति के उपाय-
~~~~~~~~~~~~~~
जिनकी कुण्डली मे चन्द्र कमजोर नीच पाप ग्रह से युत दुःस्थान य किसी प्रकार से अनिष्टकारी हो
चन्द्र के लिए : समय संध्याकाल
शिव एवं पार्वती माता की पूजा करें। अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करें।
चंद्र के मूल मंत्र का11,000 जाप करें।
मंत्र : 'ॐ श्रां श्रीं श्रोक्तं चंद्रमसे नम:'।
दान द्रव्य : मोती, सोना, चांदी, चावल, मिश्री, दही, सफेद कपड़ा, सफेद फूल, शंख, कपूर, सफेद बैल, सफेद चंदन।
सोमवार का व्रत करें।सोमवार को देवी पूजन करें।
दोमुखी रुद्राक्ष धारण करें।
मंगल पीडा निवारण
~~~~~~~~~~
जिसकी कुण्डली मे मंगल अशुभ भाव (1,4,5,8,9,12 मे मंगल अमंगलकारी) हो, उसे मंगल की शान्ति हेतू निम्न उपाय करने चाहिये
दान - मूंगा.सोना, तॉबा,मसूर, गुड, घी, लालवस्त्र,केशर ,कस्तुरी,लाल चन्दन (दान अपनी सामर्थ्य के अनसार ही करना चाहिये)
अन्नत मूल(सारिवा) की जड शरीर पर धारण करने से मंगलजनित दोष की शान्ति होती है|
मंगल मंत्र का 10,000 जप किया जाय तो शान्ति होती है मंगल मंत्र-
एकाक्षरी बीजमंत्र- ऊँ अं अंगारकाय नमः|
तांत्रिक मंत्र- ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः |
मंगल जाप करनेवाले जातक को चाहिये की वह अपनी सामर्थ्य अनुसार 4 से8 रत्ती मूगा की अंगूठी प्राणप्रतिष्ठा पूर्वक बनवा अपनी अनामिका उगली मे धारण करे और सामर्थ्य अनुसार सोने य ताबे पर निर्मित भौम यंत्र एवंभौम मूर्ति की स्थापना कर उत्तराभिमुख सूर्योदय के 1 घंटे बाद तक जप करे | जप की समाप्ति पर खैर की लकडी से हवन करे|
मंगल का व्रत करे- मंगल को नमक न खाये।
बुध ग्रह कीशान्ति के लिये
~~~~~~~~~~~~~
जिन मनुष्यो के जन्मपत्रमे बुध लग्न से ६,८,१२ भाव मे से किसी मे हो नीच अस्त य नीचास्त होकर पीडित करता हो उन्हे निम्न उपाय करने से अवश्य ही लाभ होगा |
दान- पन्ना, सोना ,कांसा,घी,मूंग,हरावस्त्र, पंचरंग के फूल, हाथी दॉत, कपूर, शश्त्र और फल|
बुध देवता स्वर्णदान से शीघ्र प्रसन्न होते है , दान अपनी सामर्थ्य अनुसार ही करना चाहिये , कर्ज लेकर नही |
बुध की शान्ति हेतू विधारा वृक्ष की जड बुधवार के दिन जबशुभ नक्षत्र हो अपने घर लाकर विधिपूर्वक पूजन करके धारण करे तो निश्चय ही बुध जनित पीडा से राहत मिलेगी|
बुध मंत्र का जाप 9000 करना चाहिये
विनियोग- उदबुध्य ईति मन्त्रस्य परमेष्ठी ऋषिः बुधे देवता त्रिष्टुपछन्दःसौम्यमंत्रजपे विनियोगः
एकाक्षरी बीज मंत्र-ॐ बुं बुधाय नमः|
तांत्रिक बुध मंत्र- ॐ ब्रां ब्रीं, ब्रौं ,सः बुधाय नमः|
कॉसे के बर्तन मे देशी घी कपूर और शक्कर डालकर पानी मे बहा दे, बर्तन घर ले आये
कुमारी कन्याओ का पूजन करे
जन्मकुडंली मे स्थित गुरु भाव व दृष्टि के अनुसार शुभ व अशुभ फल का तीव्र कारक होता है शुभ भाव मे तो शुभ कारक है किन्तु अशुभ भाव मे होने पर शनि एवं मंगल से भी अधिक कष्टकर होता है, यह मेरा निजी अनुभव है|प्रायः गुरु लग्न व गोचर मे ३,६,८,१२ भावो मे अशुभ होता है|
जिनकी कुन्डली मे गुरु ३,८,९,१२ भाव मे बैठा हो उन्हे गुरु को प्रसन्न करने का उपाय करना चाहिये|
गुरु प्रतिदान-पुखराज, सोना,चने की दाल,घी, पीला वस्त्र, हल्दी,. गीता की पुस्तक,पीले फल|
धारण- पुखराज सोने मे य केले की जड, य सारंगी की जड पीले कपडा य धागा मे|
गुरु स्तुति-
देवमन्त्री विशालाक्षः सदा लोकहिते स्तः |
अनेक शिवयैः सम्पूर्णः पीडा दहतु मे गुरुः||
विनियोग
अस्य श्री वृहस्पतिमन्त्रस्यं गृत्समदऋषि ब्रह्मा देवता त्रिष्टुपछन्द बृहस्पति- मन्त्रजपे विनियोगः
सवीज वैदिक मन्त्र-ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः ॐ भूर्भुवः स्वः| ॐ बृहस्पतेअ्अतियर्ययो् अहदियुमद्विभाति वक्रतमज्जनेषु| यददीदयच्छवसअ्ॠतप्प्रजातु तदस्मासु द्रविणन्धेहि चित्रम् ॐ स्वः भूवः भूः ॐ सः ह्रौ, ह्री, ह्रां ॐ बृहस्पतये नमः|
एकाक्षरी बीज मन्त्र- ॐ बॄं बृहस्पतये नमः|
तान्त्रिक गुरु मन्त्र- ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः|
जपसंख्या- 19000
~~~~~~~~
जन्मकुडंली मे स्थित शुक्र भाव व दृष्टि के अनुसार शुभ व अशुभ दोनो फल का तीव्र कारक होता है शुभ भाव मे तो शुभ कारक है किन्तु अशुभ भाव मे धनहानि व कलहप्रदायक है प्रायः शुक्र लग्न व गोचर मे ३,६,७,८,१२ भावो मे अशुभ होता है|
जिनकी कुन्डली मे शुक्र ३,६,७,८,१२ भाव मे बैठा हो नीच अस्त य शत्रुक्षेत्री हो उन्हे शुक्र को प्रसन्न करने का उपाय करना चाहिये|
शुक्रप्रतिदान-हीरा, चॉदी,सोना, चावल,दूध सफेद वस्त्र, कपूर,कस्तुरी,सफेद चन्दन,सफेद मिठाई|
धारण- हीरा सोने य चादी मे सरपुंखा (झोंझरु) की जड सफेद कपडा य धागा मे|
शुक्र स्तुति-
दैत्यमन्त्री गुरुस्तेषां प्राणदश्च महाशुतिः |
प्रभुस्ताराग्रहाणां च पीडां दहतु मे भृगुः||
विनियोग
अन्नात्परिस्रुत इति मन्त्रस्य प्रजापति ऋषिः अश्विसरस्वतीन्द्रा देवता जगतीछन्दः शुक्र मन्त्रजपे विनियोगः|
सवीज वैदिक मन्त्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः ॐ भूर्भुवः स्वः| ॐ अन्नात्परिस्रूतो रसम्ब्रह्मणा व्यपिवत्क्षत्रम्पयः सोमम्प्रजापतिः| ऋतेन सप्तमिन्द्रियं विपानं शुक्रमन्धसअ्इन्द्रस्येन्द्रियमिदम्पयोमृतम्मधु ॐ स्वः भूवः भूः ॐ सः द्रौ, द्री, द्रां ॐ शुक्राय नमः|
एकाक्षरी बीज मन्त्र- ॐ शुं शुक्राय नमः|
तान्त्रिक शुक्र मंत्र- द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः|
जपसंख्या- 16000
शनि राहु व केतु के मंत्र इस लिंक पर उपलब्ध है।
कृपया यह लेख आपको कैसा लगा, अपने सुधाव य शिकायत कमेमट करे। हमारी साईट को फालो करे।
धन्यवाद।
Comments
Post a Comment